भिवंडी में बीजेपी बागी चौधरी बने मेयर, कांग्रेस-NCP (SP) की रणनीति सफल

भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

Bhiwandi की नगर राजनीति में ऐसा मोड़ आया कि जोड़-घटाव की पूरी किताब फिर से लिखनी पड़ी। त्रिशंकु नतीजों के बाद जिस कुर्सी पर सबकी नजर थी, वहां आखिरकार बीजेपी से बागी हुए नारायण चौधरी बैठ गए।

मेयर पद की यह जीत सिर्फ वोटों की नहीं, टाइमिंग और टैक्टिक्स की कहानी भी है।

BNMC का गणित और गठजोड़

Bhiwandi-Nizampur Municipal Corporation में 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और बहुमत का आंकड़ा 46 पर टिकता है। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

कांग्रेस ने 30 सीटें, बीजेपी ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं। यहीं से शुरू हुआ पोस्ट-पोल पॉलिटिक्स का असली एपिसोड।

सेक्युलर फ्रंट की चाल

कांग्रेस और Nationalist Congress Party (Sharad Pawar faction) ने मिलकर एक फ्रंट बनाया और मेयर चुनाव में नारायण चौधरी को समर्थन दिया।

विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में हुए मतदान में चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला। बीजेपी उम्मीदवार स्नेहा पाटिल को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। राजनीति में यह संदेश साफ है: नंबर गेम कभी भी नैरेटिव बदल सकता है।

बीजेपी की मुश्किल

राज्य बीजेपी अध्यक्ष Ravindra Chavan ने संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से हटने पर कार्रवाई होगी। बगावत का यह अध्याय सिर्फ स्थानीय नहीं, राज्य स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कभी-कभी पार्टी सिंबल से ज्यादा असर व्यक्तिगत समीकरणों का होता है।

सियासत का सबक

भिवंडी का यह घटनाक्रम दिखाता है कि निकाय चुनाव अब केवल लोकल मुद्दों तक सीमित नहीं रहे। यहां हर सीट मिनी विधानसभा की तरह लड़ी जाती है। सत्ता की कुर्सी नगर निगम की हो या संसद की, जोड़-तोड़ का एल्गोरिद्म लगभग एक जैसा ही रहता है।

जनादेश ने कहा, “मुझे कोई पूरा नहीं मिला।” नेताओं ने जवाब दिया, “चिंता मत करो, हम जोड़ देंगे।” राजनीति में गणित की किताब में एक नया चैप्टर जुड़ गया है, 2 + 2 = परिस्थिति के हिसाब से 5 भी हो सकता है।

चिप की चेन में भारत की एंट्री! Pax Silica से टेक गेम होगा टाइट

Related posts

Leave a Comment